शराबबंदी पर निबंध || Sharabbandi Par Nibandh

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शराबबंदी पर निबंध || Sharabbandi Par Nibandh

शराबबंदी पर निबंध || Sharabbandi Par Nibandh

नमस्कार दोस्तों, आज के इस आर्टिकल में हम आपको शराबबंदी पर निबंध लिखना बताएंगे। दोस्तों अगर आपको हमारे द्वारा दी गई यह जानकारी अच्छी लगे तो अपने सभी दोस्तों को share जरूर करिएगा।


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शराबबंदी पर निबंध || Sharabbandi Par Nibandh

Table of contents –


1. परिचय

2. शराबबंदी का अर्थ 

3. शराब : एक सामाजिक कलंक

4. शराबबंदी की आवश्यकता

5. शराबबंदी है बेहद जरूरी

6. शराबबंदी पर कानून

7. शराब की कमाई

8. उपभोग

9. निष्कर्ष

10. FAQ Questions 


"छोड़ो नशा और शराब

ना करो जीवन खराब।"


परिचय –


आज हम आधुनिक जमाने में जी रहे हैं और अगर आप इस जमाने के साथ-साथ नहीं चलते हैं तो आप पिछड़ जाएंगे। फिर चाहे वह पढ़ाई का क्षेत्र हो या फिर नौकरी का या अपनी प्रतिष्ठा या सामाजिक स्थिति का हो। आजकल इसी समाज में लोगों के बीच जिन्हें हम आधुनिक भी कहते हैं। कुछ ऐसी आदतों का चलन है जो बहुत तेजी से लोगों में फैलता जा रहा है। उन्हीं में से एक है शराब के सेवन की आदत, जो युवाओं को तो अपने आगोश में ले ही चुका है। इसके अलावा बड़े बुजुर्गों के बीच भी यह खास लोकप्रिय है।


कोई भी अवसर हो, चाहे उत्सव, या फिर जन्मदिन, या शादी-विवाह, यहां तक कि किसी तरह का मिलन समारोह भी शराब के बिना अधूरा समझा जाता है। खास बात तो ये है कि अगर आप इस श्रेणी में शामिल नहीं है, तो आपको हीन भावना से देखा जाता है। और तो और आप उस समूह में होकर भी एकदम अकेले हो जाते हैं जो कई-कई बार खुद आपको भी शर्मनाक लगने लगता है। बहुत से लोग इसे शौक के तौर पर अपने जीवन का हिस्सा बना लेते हैं जबकि कई लोग इसका सेवन करना शान समझते हैं।


शराबबंदी का अर्थ –


वे पदार्थ जिनके सेवन से मानसिक विकृति उत्पन्न होती है। नशीले या मादक द्रव्य कहलाते हैं। नशीली वस्तुओं पर प्रतिबंध या इनका व्यवस्थित प्रयोग नशाबंदी है। किसी प्रकार के अधिकार, प्रवृत्ति,बल आदि मनोविकार की अधिकता, तीव्रता या प्रबलता के कारण उत्पन्न होने वाली अनियंत्रित या असंतुलित मानसिक अवस्था नशा होता है जैसे - जवानी का नशा, दौलत का नशा या मोहब्बत का नशा इनको व्यवस्थित रूप देना नशाबंदी है।


शराब : एक सामाजिक कलंक -


यदि आप शराब का सेवन करते हैं तो आप एक शानदार इंसान हैं, और आप खुद भी देखेंगे कि आपके साथ रहने वालों की संख्या हमेशा काफी ज्यादा होती है वहीं दूसरी तरफ अगर आप शराब से दूरी बनाकर रखते हैं तो लोग भी स्वत: ही आपसे दूर होते जाते हैं। ऐसा लगता है जैसे समाज में शराब और इसका सेवन करने वालों ने आधिपत्य जमा रखा है।

शराब का सेवन किस हद तक अपने दुष्परिणाम दिखा सकता है यह किसी से छिपा नहीं है फिर चाहे वह समाज हो, सरकार हो या फिर खुद इसका सेवन करने वाला हो। लेकिन फिर भी लोग इसकी तरफ आकर्षित होते हैं और अपने जीवन में सबसे अधिक महत्व भी देते हैं। शराब ना सिर्फ इसका सेवन करने वाले का नाश करता है बल्कि समाज में एक कलंक के रूप में भी जाना जाता है क्योंकि इसकी वजह से न जाने कितने परिवार उजड़ते हैं और कितनी जिंदगियां बर्बाद होती है। लेकिन इसके बावजूद सरकार इसे लेकर कोई भी ठोस कदम नहीं उठाती है।


शराबबंदी की आवश्यकता –


इसमें कोई दो राय नहीं है कि शराब एक जानलेवा चीज है इसके लाभ कुछ नहीं है बल्कि सिर्फ और सिर्फ नुकसान ही है। शराब से न केवल मनुष्य का शरीर बल्कि उसका पैसा, परिवार, सुख-चैन सभी का नुकसान होता है। जब लोगों को इसके दुष्परिणाम दिखते हैं या वो खुद इसका सामना करते हैं तब अक्सर ही शराबबंदी की आवाज बुलंद होती है, जो कि एकदम सही है। शराबबंदी होनी ही चाहिए क्योंकि यह कहीं से भी फायदेमंद नही है।


शराबबंदी है बेहद जरूरी –


देखा जाए तो आज की तारीख में इंसान अपनी इस तरह की गलत आदतों के चलते उम्र को घटा रहा है। आप खुद इस बात पर गौर कर सकते हैं हमारी पहले की पीढ़ियां लंबे समय तक स्वास्थ्यपूर्ण जीवन जीतीं थीं लेकिन आज तमाम सुख-सुविधाओं के बावजूद हम कुछ गलत आदतों का चुनाव करके अपनी उम्र को प्राकृतिक और अप्राकृतिक दोनों तरह से कम करने पर तुले हुए हैं। इसमें कोई दो राय नहीं है कि शराब एक जानलेवा चीज है इसके लाभ कुछ नहीं है बल्कि सिर्फ और सिर्फ नुकसान ही हैं। शराब से न केवल मनुष्य का शरीर बल्कि उसका पैसा, परिवार, सुख-चैन सभी का नुकसान होता है। जब लोगों को इसके दुष्परिणाम दिखते हैं या वो खुद इसका सामना करते हैं तब अक्सर शराबबंदी की आवाज बुलंद होती है जोकि एकदम सही है। शराबबंदी होनी ही चाहिए क्योंकि यह कहीं से भी फायदेमंद नहीं है।


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शराबबंदी पर कानून –


धारा 21 द्वारा संविधान ने राज्यों को अधिकार दिया है कि वह सार्वजनिक संपत्ति के अनुसार शराबबंदी के नियमों को बनाएं। भारतवर्ष में भी इस विषय में तीव्र मतभेद है कि क्या शराबबंदी को कानून द्वारा बंद करना उचित है या सार्वजनिक संपत्ति उत्पन्न करके सामाजिक सुधार के रूप में इसे धीरे-धीरे प्रचलित करना चाहिए।


शराब की कमाई –


शराब की कमाई का आबादी से खास वास्ता नहीं है। इसका अंदाज इसी से लगाया जा सकता है कि 20 करोड़ की आबादी वाले उत्तर प्रदेश की शराब से होने वाली सालाना आय महज 12000 करोड रुपए की है, जबकि 7.5 करोड़ के जनसंख्या वाला तमिलनाडु शराब बिक्री के जरिए 26,000 करोड रुपए कमाता है। यह तो हुई कमाई की बात। दूसरा पहलू देखें तो एक रोचक आंकड़ा यह भी है कि तमिलनाडु में शराब की दुकानों की संख्या 6,823 है, जबकि पुस्तकालयों की संख्या महज 4,028 ही है।


उपभोग –


भारत में बनने वाली विदेशी शराब की देश भर में सबसे अधिक बिक्री आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु में है। यह 21-21 फीसदी है। इसके बाद कर्नाटक का नंबर आता है, जहां इसकी बिक्री 18 फ़ीसदी है। देशभर में आईएमएफएल की 60% बिक्री इन्हीं प्रदेशों में होती है। देश में सबसे अधिक शराब केरल में पी जाती है। यहां इसकी प्रति व्यक्ति खपत सलाना 8.3 लीटर है जबकि राष्ट्रीय औसत 5.7 लीटर है। केरल में आगामी 10 साल में चरणबद्ध तरीके से पूर्ण शराबबंदी लागू की जानी है। अब केवल पांच सितारा होटलों में ही शराब परोसी जा सकेगी। केरल में शराब की खुदरा बिक्री सरकारी दुकानों के जरिए होती है। हर साल 10 फ़ीसदी दुकानों को बंद करते हुए आगामी 10 साल में सभी को बंद कर दिया जाएगा। शराब की सबसे अधिक बिक्री के मामले में तमिलनाडु शीर्ष पर है, जबकि कर्नाटका ऐसा राज्य है, जहां बच्चों तक में अल्कोहल की लत भी चिंता का विषय बनी हुई है।


निष्कर्ष –


आम नागरिक हो या फिर सरकार सभी को इस दिशा में गंभीरता से सोचना चाहिए और एक ठोस कदम उठाना चाहिए। जब हर कोई जानता है कि शराब का सेवन फलदायी नहीं है और इससे सिर्फ अपराध, और नुकसान की स्थिति ही उत्पन्न होती है तो आखिर इसे समाज में जगह दी ही क्यों जाए। निश्चित रूप से शराबबंदी को लेकर ठोस कदम उठाया जाना चाहिए।


Frequently Asked Questions (FAQ) –


प्रश्न - शराबबंदी क्या है?

उत्तर - भारत में गुजरात, बिहार, मिजोरम और नागालैंड राज्य में पूर्ण रूप से शराबबंदी है। भारतीय संविधान में राज्य के नीति निदेशक तत्वों से संबंधित अनुच्छेद-47 में मादक पेयों व हानिकारक नशीले पदार्थों का प्रतिषेध करने का प्रयास करने को कहा गया है।


प्रश्न - शराब पीने के फायदे क्या हैं?

उत्तर - अल्कोहल का नियंत्रित सेवन सेहत के लिए खून में अच्छा एचडीएल कोलेस्ट्रॉल बढ़ाता है। साथ ही यह फाइब्रिनोजेन जैसे घटक कम करता है, जो नसों में खून जमने से हार्ट अटैक या स्ट्रोक का कारण बनते हैं। रिसर्चर यह भी दावा करते हैं कि सीमित शराब पीने वालों को टाइप-2 डायबिटीज पित्त पथरी का जोखिम कम रहता है।


प्रश्न - शराब पीने से हमारे शरीर पर क्या प्रभाव पड़ता है?

उत्तर - आपके स्वास्थ्य पर दुष्प्रभाव लीवर की बीमारी - ज्यादा शराब पीने से लीवर में फैट बढ़ सकता है और लीवर में सूजन भी आ सकती है। समय के साथ, ज्यादा शराब पीने वालों के लीवर के ऊतकों के निशान पड़ जाते हैं जो खतरनाक और अपरिवर्तनीय होते हैं।


प्रश्न - शराबबंदी को कैसे रोका जा सकता है?

उत्तर - शराब की बिक्री और सेवा के बारे में मौजूदा कानूनों और विनियमों को लागू करें। अत्यधिक शराब के उपयोग को कम करने के लिए स्कूलों विश्वास-आधारित संगठनों, कानून प्रवर्तन, स्वास्थ्य देखभाल और सार्वजनिक स्वास्थ्य एजेंसियों के बीच साझेदारी बनाने वाले सामुदायिक गठबंधन विकसित करें।


प्रश्न - भारत में शराबबंदी कब हुई?

उत्तर - कर्पूरी ठाकुर ने बिहार में पहली बार 1977 में शराबबंदी की थी।

यह Blog एक सामान्य जानकारी के लिए है इसका उद्देश्य सामान्य जानकारी प्राप्त कराना है। इसका किसी भी वेबसाइट या Blog से कोई संबंध नहीं है यदि संबंध पाया गया तो यह एक संयोग समझा जाएगा।  

यहां पर आपको शराबबंदी पर निबंध के बारे में बताया गया है। इस प्रकार की अन्य जानकारी के लिए आप nityastudypoint.com पर विजिट कर सकते हैं। दोस्तों अगर आपको यह पोस्ट पसंद आई हो तो अपने सभी दोस्तों को social media platform WhatsApp, Facebook or telegram पर share करिएगा।



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