श्रीमद्भागवत गीता पर निबंध || Essay on Bhagwat Geeta in Hindi

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श्रीमद्भागवत गीता पर निबंध || Essay on Bhagwat Geeta in Hindi

श्रीमद्भागवत गीता पर निबंध || Essay on Bhagwat Geeta in Hindi

प्रस्तावना


श्रीमद्भागवत गीता एक ऐसा ग्रंथ है जिसे दुनिया की सबसे पवित्र ग्रंथों में से एक माना जाता है। हमारे जीवन के हर क्षेत्र में यह ग्रंथ में सफलता पाने में 1 साथी की तरह मदद करता है।

श्रीमद्भागवत गीता पर निबंध || Essay on Bhagwat Geeta in Hindi

क्योंकि भगवान कृष्ण ने इस ग्रंथ में बताई हुई हर बात हमारे जीवन से जुड़ी है। यह ग्रंथ भारत देश के लोकप्रिय महाकाव्य महाभारत का एक हिस्सा है, जहां भगवान कृष्ण ने कुरुक्षेत्र के मैदान में अर्जुन को गीता सुनाई थी।


Table of contents 

श्रीमद्भागवत गीता पर निबंध - Essay on Bhagwat Geeta in Hindi

प्रस्तावना

तीन पवित्र ग्रंथों में से एक

जीवन का मार्ग है श्रीमद्भागवत गीता

गीता का कर्म योग

भागवत गीता पर निबंध 500 शब्द

भगवत गीता निबंध क्या है?

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निष्कर्ष


तीन पवित्र ग्रंथों में से एक


हमारे भारत देश में हिंदू धर्म में 3 मुख्य पवित्र ग्रंथ है। श्रीमद्भागवत गीता इन तीनों मुख पवित्र ग्रंथ में से एक है।


बागी2 ग्रंथ उपनिषद और ब्रह्म सूत्र है। इन तीनों पवित्र जंतु का हिंदू धर्म में बहुत ज्यादा महत्व है।


जीवन का मार्ग है श्रीमद्भागवत गीता


हम भौतिकवादी जीवन में अपना सारा समय बिताते हैं। जिससे हमारे ऊपर विभिन्न प्रकार के मानसिक शारीरिक दंड बने रहते हैं। इससे निजात पाने के लिए हम कृष्ण जी की वाणी से प्राप्त इस गीता के अमृत वचनों का पान कर सकते हैं। जिससे हमारा जीवन उन परेशानियों से ऊपर उठ जाएगा और हम अपने मार्ग से कभी भी विचलित नहीं होंगे।


संयम और ऊर्जा का केंद्र है गीत


 भगवत गीता में भक्ति योग कर्म योग और हठयोग जैसे योग का अभ्यास करने के बारे में बताया गया है। जिस के विभिन्न पहलू लोगों के माध्यम से कृष्ण ने अर्जुन को सुनाया था। जिसके बाद ऊर्जा कर्म के प्रति सजगता और निर्विकार होकर अपने कर्म के प्रति समभाव करने की बात बताई गई है। यह सभी चीजें गीता में लिखित है इन सब को अपने जीवन में प्रयोग कर सकारात्मक ऊर्जा और मजबूत विश्वास को बढ़ा सकते हैं और खुद के जीवन को दीपक के सामान जला सकते हैं।


भागवत गीता पर निबंध 500 शब्द


गीता महाभारत के भीष्म पर्व का एक भाग है, जिसमें 18 अध्याय तथा 700 श्लोक हैं. गीता में कई तरह के दर्शनिक तथा धार्मिक सिद्धांत को प्रस्तुत किया गया है।


जैसे योग, स्वधर्म ,स्थितप्रज्ञ , आपद धर्म, कर्म योग ,लोक संग्रह की अवधारणा, राज ऋषि का सिद्धांत  तथा निष्काम कर्म का सिद्धांत.



गीता की सभी सिद्धांतों का केंद्र बिंदु मनुष्य को को अपने कर्तव्यों के प्रति जागरूक करना ही है। श्रीमद्भागवत गीता में कृष्ण के द्वारा दिए गए अर्जुन को उपदेश ओं का वर्णन किया गया है।


जब लड़के मैदान में अर्जुन अपने क्षत्रिय धर्म को इस बात पर टालना चाहता है, तब भगवान श्रीकृष्ण ने गीता के उपदेश अर्जुन को सुनाते हैं तथा अर्जुन को अपने कर्तव्य के प्रति जागृत कर आ धर्म के विरुद्ध लड़ने के लिए तैयार करते हैं।


गीता का प्रमुख उद्देश्य सभी परिस्थितियों में व्यक्ति को अपने कर्तव्य पथ से विचलित ना होने का संदेश देना। जिसके लिए श्री कृष्ण ने निष्काम कर्म करने की शिक्षा दी।


श्री कृष्ण ने अर्जुन को संदेश देते हुए बताया कि परिणामों की ओर ध्यान ना देकर तथा फल की इच्छा किए बगैर अपने कर्तव्यों का पालन करना चाहिए।


गीता निष्काम कर्म योग के सिद्धांत के साथ ही आत्मा की अमरता अर्थात पुनर्जन्म की अवधारणा को स्वीकार किया गया है। गीता में कहा गया है "आत्मा को ना तो कोई शस्त्र  सकता है,ना ही उसे जला सकती है,"अर्थात आत्मा अमर है और आत्मा अजर है।


श्री कृष्ण ने अर्जुन को उपदेश देते हुए बताया कि तुम्हारा अधिकार केवल कर्म करने पर है उसके परिणाम पर नहीं इसलिए परिणाम से प्रेरित होकर कर्म नहीं करना चाहिए।


निष्काम कर्म की शिक्षा के द्वारा श्री कृष्ण ने अर्जुन के अंत तथा हृदय में बैठे गहरे डर को दूर करने का प्रयास किया, जिसमें अर्जुन युद्ध के बाद की भयावह स्थिति जिसमें उसके अपने परिवार के लोग मारे जाने थे, ऐसी कल्पना करके अर्जुन हथियार डाल चुका था।


निष्काम कर्म सिद्धांत ज्ञान ,भक्ति तथा कर्म के बीच पाए जाने वाले  आंतरिक  द्वंद्व के मध्य बेहतर सामंजस्य स्थापित करने का  लाजवाब प्रयास किया गया है इसलिए निष्काम कर्म सिद्धांत को सर्वांगीण योग की संज्ञा भी दी जाती है।


गीता में कहा गया है, कि कर्मों का फल अवश्य ही मिलेगा परंतु उनके प्रति आसक्ति की भावना नहीं होनी चाहिए। प्रत्येक व्यक्ति को बिना किसी लालच के अपने धर्म के अनुसार तथा अपने स्वभाव के अनुसार पूर्व निर्धारित कर्तव्यों का पालन करना चाहिए।


निष्काम कर्म सिद्धांत  प्रवृत्ति मार्ग तथा निवृत्ति मार्ग के बीच का अर्थात मध्यम मार्ग स्थापित करने का संदेश देता है ,जिसके अनुसार फल की इच्छा ना करना निवृत्ति मार्ग तथा कर्तव्य का पालन करना प्रवृत्ति मार्ग की अवधारणाएं हैं.


गीता का कर्म योग


गीता का कर्म योग अन्य धार्मिक कर्मकांड से कई अलग है कर्म योग के आधार पर गीता में अपने कार्य के प्रति समर्थन और निश्चल भाव से उस कार्य को लगातार करते रहने का ज्ञान दिया है। जिसके उपरांत उसकी सफलता पाने से कोई रोक नहीं सकता है। इस कर्मियों को पाकर बहुत सारे लोगों ने अपने जीवन को सफल और सुलभ बना लिया है। और अपने लक्ष्य को प्राप्त किया है।


निष्कर्ष


यदि आप अपने जीवन में सभी नकारात्मक विचारों और भावनाओं की पूरी तरह से नष्ट करना चाहते हैं और अपने मन को साकार तुम विचारों और भावनाओं से भरकर सफलता प्राप्त करना चाहते हैं, तू आपको अपने जीवन में श्रीमद्भागवत गीता जैसे ग्रंथ को अपनाना होगा और इसमें बताई भी बातों का पालन करना होगा।


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प्रश्न-  जीवन में गीता का क्या महत्व है?

उत्तर- भगवत गीता को पढ़ना हमें जीवन के बारे में सच्चाई से परिचित कराता है और अंधविश्वास और झूठी मान्यताओं से मुक्ति पानी में हमारी मदद करता है। गीता से प्राप्त ज्ञान हमारे संदेशों को दूर करता है और हमारे आत्मविश्वास का निर्माण करता है।


प्रश्न-  गीता का ज्ञान क्या है?

उत्तर- गीता में 18 अध्याय और 700 श्लोक हैं जिनमें धर्म के मार्ग का अनुसरण करते हुए सद् कर्म करने की शिक्षा दी गई है. जीवन की सभी दुविधाओं और समस्याओं का हल गीता में मिलता है. माना जाता है कि गीता के बातों का अनुसरण करने से जीवन बदल जाता है और व्यक्ति को हर काम में सफलता मिलती है.


प्रश्न-  भगवत गीता निबंध क्या है?

उत्तर- भगवत गीता हिंदू धर्म की पवित्र पुस्तकों में से एक है। इसकी रचना लगभग दो हजार वर्ष पूर्व महाभारत के एक भाग के रूप में की गई थी। इसमें भगवान श्री कृष्ण द्वारा दी गई शिक्षाएँ हैं जो सर्वोच्च भगवान हैं। पुस्तक (भगवत गीता) में, कुरुक्षेत्र युद्ध शुरू होने से पहले कृष्ण एक धनुर्धर अर्जुन से बात कर रहे हैं।


प्रश्न-  श्रीमद्भागवत गीता से हमें क्या शिक्षा मिलती है?

उत्तर- गीता में आत्मा, परमात्मा, भक्ति, कर्म, जीवन आदि का वृहद रूप से वर्णन किया गया है. गीता से हमें यह ज्ञान मिलता है कि व्यक्ति को केवल अपने काम और कर्म पर ध्यान देना चाहिए. साथ ही कर्म करते समय इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि हम जो भी कर्म कर रहे हैं, उसका फल भी हमें निश्चित ही प्राप्त होगा.


प्रश्न-  गीता के अनुसार मनुष्य का धर्म क्या है

उत्तर- गीता में आत्मा, परमात्मा, भक्ति, कर्म, जीवन आदि का वृहद रूप से वर्णन किया गया है. गीता से हमें यह ज्ञान मिलता है कि व्यक्ति को केवल अपने काम और कर्म पर ध्यान देना चाहिए. साथ ही कर्म करते समय इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि हम जो भी कर्म कर रहे हैं, उसका फल भी हमें निश्चित ही प्राप्त होगा.


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