भारत में स्वास्थ्य समस्याएं Health problems in India (communicable diseases)

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भारत में स्वास्थ्य समस्याएं Health problems in India (communicable diseases)

भारत में स्वास्थ्य समस्याएं Health problems in India (communicable diseases)

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भारत में स्वास्थ्य समस्याएं Health problems in India (communicable diseases)


Table of contents


संक्रामक बीमारियों संबंधित समस्याएँ

1.क्षयरोग (Tuberculosis)

2.मलेरिया (Malaria)

3.कुष्ठ रोग (Lepross )

4.दस्त रोग (Diarrhoeal diseases)

5. तीव्र श्वसनीय संक्रमण (Acute Respiratory Infections)

6. डेंगू बुखार (Dengue fever)

7.लिम्फेटिक फायलेरियसिस(Lymphatic filariasis)

8.आंत्र ज्वर (Enteric fever)

9.एड्स (AIDS)

10.यौन संचारित बीमारियाँ 


हमारा देश अनेक स्वास्थ्य समस्याओं से घिरा हुआ है, जिनमें कुछ प्रमुख निम्न हैं-


 1. संक्रामक बीमारियों संबंधित समस्याएँ (Communicable diseases problems )


 2. असंक्रामक बीमारियों संबंधित समस्याएँ (Non-Communicable diseases problems ) 


3. पोषणीय समस्याएँ (Nutritional problems )


4. जनसंख्या विस्फोट (Population explosion )


5. पर्यावरणीय प्रदूषण संबंधी समस्याएँ (Environmental pollution problems )


6. चिकित्सा देखभाल संबंधी समस्याएँ (Medical care problems)


संक्रामक बीमारियों संबंधित समस्याएँ (Communicable diseases problems ) - संक्रामक बीमारियों की मौजूदगी आज भी एक प्रमुख स्वास्थ्य समस्या बनी है। ऐसी बीमारियाँ जो एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति तक संचारित हो जाती हैं, में पाई जाने वाली मुख्य संक्रामक बीमारियाँ निम्न हैं -


(i) क्षयरोग (Tuberculosis)


(ii) मलेरिया (Malaria)


(iii) कुष्ठ रोग (Lepross )


(iv) दस्त रोग (Diarrhoeal diseases)


(v) तीव्र श्वसनीय संक्रमण (Acute Respiratory Infections)


(vi) डेंगू बुखार (Dengue fever)


(vii) लिम्फेटिक फायलेरियसिस (Lymphatic filariasis )


(viii) आंत्र ज्वर (Enteric fever)


(ix) एड्स (AIDS)


(x) यौन संचारित बीमारियाँ (Sexually Transmitted Discases) आदि ।


1. क्षय रोग (Tuberculosis) - क्षय रोग माइकोबैक्टीरियम ट्यूबरकुलोसिस नामक जीवाणु द्वारा उत्पन्न होने वाली बीमारी है जो कि मुख्य रूप से बिन्दुक संक्रमण (Droplet infection) द्वारा फैलती है। आँकड़ों के मुताबिक हमारे देश में प्रतिवर्ष लगभग 3.20 लाख लोग TB के कारण मौत के मुँह में चले जाते हैं। वर्ष 2016 में TB के मामलों की incidence लगभग 27.90 लाख या 211 / Lac थी। इसी प्रकार HIV-TB तथा MDRTB की incidence क्रमश: 87,000 तथा 1,47,000 थी । इसके अलावा देश में TB के कारण होने वाली मृत्यु दर लगभग 25 प्रति लाख है । इस प्रकार आँकड़ों से स्पष्ट होता है कि TB एक गंभीर स्वास्थ्य समस्या है। हालाकि प्रत्यक्ष अवलोकित लघु अवधि उपचार (DOTS) के उद्भव के बाद इसका निदान तथा उपचार काफी आसान हुआ है। क्षय रोग के मुख्य क्लिनिकल लक्षण निम्न हैं :2 सप्ताह से अधिक समय तक खाँसी रहना (Cough for more than 2 weeks )।


-हल्का बुखार (Mild fever)


*-भूख का कम हो जाना (Loss of appetite)।


- वजन कम हो जाना (Weight loss )।


- सीने में दर्द (Chest pain)।


-बलगम के साथ खून आना (Hemoptysis)


-खून की उल्टी होना ( Hemetemesis )


2.मलेरिया (Malaria) - मलेरिया एक खतरनाक संक्रामक रोग है जो कि प्लाज्मोडियम (Plasmodium) नामक प्रोटोजोआ (Protozoa ) द्वारा उत्पन्न होता है। इस रोग का संचारण (Transmission) मादा एनोफिलीज (Female anophelese) नामक मच्छर द्वारा किया जाता है। वर्ष 2011 में हमारे देश में मलेरिया के लगभग 13 लाख रोगी पाये गये थे, जिनमें से लगभग 65 लाख रोगी प्लाज्मोडियम फैल्सिपेरम (Plasmodium falciparum) के थे। इसके अलावा लगभग 450 व्यक्ति मलेरिया के कारण मौत के मुँह में चले गये थे। हाँलाकि ग्रामीण क्षेत्रों से मृत्यु संबंधी विशुद्ध आँकड़े नहीं मिल पाने के कारण इसके कारण होने वाली मृत्युओं की वास्तविक संख्या को बता पाना संभव नहीं है।


हॉलाकि मलेरिया मुख्य रूप से मादा एनोफिलीज मच्छर के काटने से फैलता है लेकिन यह संक्रमित रक्त (Infected blood) के चढ़ाने से, संक्रमित सूई के पुनः उपयोग करने से तथा संक्रमित माता से उसके नवजात में जैसे तरीकों द्वारा भी फैल सकता है।


3. कुष्ठरोग (Leprosy ) - कुष्ठ रोग एक दीर्घकालीन ग्रेन्युलोमेटस बीमारी (Chronic granulomatus diseases) है जो कि माइकोबैक्टीरियम लेप्री नामक जीवाणु द्वारा उत्पन्न होती है । यह बीमारी मुख्य रूप से बिन्दुक संक्रमण (Droplet infection) द्वारा तथा एक स्वस्थ किन्तु प्रवणशील (Susceptible) व्यक्ति के लम्बे समय तक कुष्ठ रोगी के सम्पर्क में रहने से संचारित हो सकती है। वर्ष 2014-15 में हमारे देश में कुष्ठ रोग के लगभग 1 लाख 25 हजार नये मामले पाये गये जिनमें से लगभग 52% मामले अर्थात् लगभग 65 हजार मामले मल्टीबैसीलरी कुष्ठ रोग (Multibacillary leprosy) के थे। कुष्ठ रोगियों को दो भागों में वर्गीकृत किया जा सकता है -


(a) पॉसीबैसीलरी कुष्ठरोग (Paucibacillary leprosy ) – ऐसे रोगी जिनमें एक से पाँच त्वचीय घाव (Skin lesions) पाये जाते हैं तथा / अथवा केवल एक ही तंत्रिका (Nerve) प्रभावित होती है, पॉसीबैसीलरी कुष्ठ रोग से ग्रसित रोगी कहलाते हैं। देश में मौजूद कुल रोगियों में से आधे से ज्यादा इस प्रकार के रोगी हैं ।


(b) मल्टीबैसीलरी कुष्ठरोग (Multibacillary leprosy ) – ऐसे रोगी जिनमें पाँच से अधिक त्वचीय घाव पाये जाते हैं तथा/अथवा एक से अधिक तंत्रिकाएँ (Nerves) प्रभावित होती हैं, मल्टीबैसीलरी कुष्ठ रोग से ग्रसित रोगी कहलाते हैं ।


4. दस्तरोग (Diarrhoeal diseases)- दस्त रोग पाँच वर्ष से छोटे बच्चों में रूग्णता (Morbidity) एवं मृत्यु (Mortality) का एक प्रमुख कारण है। दस्तों के दौरान होने वाली जल एवं खनिज लवणों की हानि निर्जलीकरण (Dehydration) की स्थिति उत्पन्न कर देती है जो कि एक गंभीर समस्या है। वर्ष 2011 के दौरान दस्त के लगभग एक करोड़ मामले दर्ज किये गये, जिनमें से लगभग 1300 लोगों की मृत्यु हो गई । दस्त रोग के लिए जिम्मेदार मुख्य सूक्ष्म जीव हैं -


रोटावायरस (Rotavirus) 


कोरोनावायरस (Coronavirus)


शीजेला (Shigella)


विब्रियो कोलेरी (Vibrio cholerae)


एडीनोवायरस (Adenovirus) 


ई-कोलाई (E.Coli.)


साल्मोनेला (Salmonella)


विब्रियो कोलेरी नामक जीवाणु के संक्रमण के कारण हैजा (Cholera) हो जाता है जिसमें तीव्र एवं गंभीर दस्त के साथ उल्टी (Vomiting with acute and severe diarrhoea) भी मौजूद रहती है।


5.तीव्र श्वसनीय संक्रमण Acute Respiratory Infections)- तीव्र श्वसनीय संक्रमण छोटे बच्चों में रूग्णता एवं मृत्यु का एक प्रमुख कारण है। वर्ष 2014 में तीव्र श्वसनीय संक्रमणों (ARIs) के लगभग 34.80 मिलियन मामले दर्ज किये गये तथा लगभग 2930 लोग इसके कारण मौत के मुँह में चले गये।


6.डेंगू बुखार (Dengue fever) - यह रोग डेंगू फीवर वायरस द्वारा उत्पन्न होता है जो कि एक आर्बोवायरस (Arbovirus) होता है। इस रोग को हड्डी तोड़ बुखार (Break bone fever) के नाम से भी जाना जाता है। यह एक आर्थ्रोपोड जनित वायरल बीमारी (Arthropod borne viral diseases) है। वर्ष 2014 में हमारे देश में डेंगू के लगभग 40 हजार रोगी तथा 130 मौतें दर्ज हुई थीं ।


7. लिम्फेटिक फाइलेरियसिस (Lymphatic filariasis ) - यह बीमारी मुख्य रूप से वुचेरेरिया बेंक्रोफ्टाई (Wuchereria bancrofti) तथा ब्रूजिया मालायी (Brugia malayi) जैसे परजीवियों द्वारा उत्पन्न होती है। रोग का संचारण संक्रमित मच्छरों द्वारा किया जाता है। देश के 14 जिलों एवं 06 केन्द्रशासित प्रदेशों में फाइलेरियसिस एन्डेमिक बीमारी (Endemic diseases) के रूप में फैला हुआ है तथा लगभग 550 मिलियन लोग फाइलेरियसिस की जोखिम युक्त क्षेत्रों में निवास करते हैं। वुचेरेरिया बेंक्रोफ्टाई के कारण होने वाले फाइलेरियसिस की फैलाव दर ब्रूजिया मालायी के कारण होने वाले फाइलेरियसिस से अधिक है।


8.आंत्र ज्वर (Enteric fever) - आंत्र ज्वर में टायफाइड (Typhoid) तथा पेराटायफाइड (Paratyphoid) दोनों प्रकार के ज्वर सम्मिलित हैं। यह बीमारी मुख्य रूप से मलीय-मुखीय (Feco-oral) तथा मूत्रीय–मुखीय (Urine-oral) मार्ग द्वारा संचारित होती है। यह एक जीवाणु जनित बीमारी है जो साल्मेनेला टाइफी (Salmonella typhi) तथा साल्मोनेला पेराटाइफी टाइप-ए तथा टाइप - बी (Salmonella parathyphi type A & B) द्वारा उत्पन्न होती है। देश के ऐसे क्षेत्र जहाँ जलापूर्ति व्यक्तिगत स्वच्छता, पर्यावरणीय स्वच्छता आदि का निम्न स्तर मौजूद है, वहाँ इसके पाये जाने की संभावना अधिक रहती है। टायफाइड हमारे देश में एन्डेमिक बीमारी के रूप में मौजूद है। आँकड़ों के मुताबिक वर्ष 2014 में इसके लगभग 17 लाख मामले दर्ज किये गये थे तथा इसके कारण लगभग 425 लोगों की मौत हुई थी।


 9. एड्स (AIDS)- एड्स एक अत्यधिक गंभीर संक्रामक बीमारी है जो कि ह्यूमन इम्यूनो डेफिसिएन्सी वायरस (Human Immunodeficiency Virus) के द्वारा फैलती है । इसका पूरा नाम एक्वायर्ड इम्यूनो डेफिसिएन्सी सिन्ड्रोम है। यह बीमारी मुख्य रूप से असुरक्षित यौन संबंधों ( Unprotected sexual relations) के द्वारा फैलती है। हालाकि इसके अलावा संक्रमित सूई का पुनः उपयोग, संक्रमित रक्त के चढ़ाने तथा गर्भवती माता से उसके गर्भस्थ शिशु में जैसे माध्यमों द्वारा भी इस रोग का संचारण हो सकता है।


हमारे देश में इसकी फैलाव दर (Prevalence rate) 0.3-0.5% है। देश में एड्स का पहला रोगी वर्ष 1986 में चेन्नई में पाया गया था। यह संख्या बढ़कर सन् 2008-09 तक लगभग 24 लाख हो गई है ।


10. यौन संचारित बीमारियाँ (Sexually Transmitted Diseases)


जैसा कि नाम से स्पष्ट है वे संक्रामक बीमारियाँ (Communicable diseases) जो संभोग प्रक्रिया (Sexual intercourse) के द्वारा एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में फैलती हैं, संभोग द्वारा फैलने वाली diseases या sexually transmitted disease कहलाती है।


FAQ questions-


1.स्वास्थ्य स्तर पर भारत कौन से अंक पर आता है?

उत्तर-एशिया प्रशांत देशों में व्यक्तिगत स्वास्थ्य सेवा सुविधा को लेकर हुए एक सर्वे में पता चला है। कि भारत 11 देशों की सूची में 10वें नंबर पर है।


2.भारत की स्वास्थ्य सेवाएं क्या है?

उत्तर-स्वास्थ्य सेवाओं में अस्पताल, चिकित्सा उपकरण नैदानिक परीक्षण, आउटसोर्सिंग, टेलीमेडिसिन, चिकित्सा पर्यटन, स्वास्थ्य बीमा और चिकित्सा उपकरण शामिल हैं।


3.प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल क्यों महत्वपूर्ण हैं?

उत्तर-प्राथमिक उपचार का मुख्य उद्देश्य व्यक्ति की जान बचाना होता है। इसके अलावा प्राथमिक उपचार संक्रमण होने की संभावना को कम करने में मदद करता है।लंबे समय तक चिकित्सा देखभाल की आवश्यकता को कम करता है।


4.बीमारी से आप क्या समझते हैं?

उत्तर- शरीर के पूर्णरूपेण कार्य करने में किसी प्रकार की कमी होना रोग कहलाता है। जिस व्यक्ति को रोग होता है।उसे रोगी कहते हैं हिंदी में रोग को बीमारी और विकार भी कहते हैं।


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