महाराणा प्रताप जीवनी - biography of Maharana Pratap in Hindi jivani

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महाराणा प्रताप जीवनी - biography of Maharana Pratap in Hindi jivani

महाराणा प्रताप जीवनी -  biography of Maharana Pratap in Hindi jivani

महाराणा प्रताप का बचपन


सोलह सत्रह वर्ष की अल्पायु में महाराणा प्रताप सैनिक अभियानों में जाने लगे. वागड़ के सांवलदास व उनके भाई कर्मसी चौहान को सोम नदी के किनारे युद्ध में परास्त किया. छप्पन क्षेत्र के राठौड़ो व गौड़वाड़ क्षेत्र को भी परास्त कर अपने अधीन कर लिया. 


महाराणा प्रताप जीवनी -  biography of Maharana Pratap in Hindi jivani
महाराणा प्रताप जीवनी -  biography of Maharana Pratap in Hindi jivani

महाराणा प्रताप की वीरता की सर्वत्र प्रशंशा होने लगी. उसी समय महाराणा प्रताप का विवाह राव मामरख पंवार की पुत्री अजबदे महाराणा प्रताप की पत्नी (वाइफ, जीवनसाथी) बनी.


Table of contents 

महाराणा प्रताप जीवनी -  biography of Maharana Pratap in Hindi jivani

महाराणा प्रताप का बचपन

आरंभिक जीवन :

महाराणा प्रताप का इतिहास

महाराणा प्रताप की कहानी | Maharana Pratap Story In Hindi

सफलता

महाराणा प्रताप क्यों प्रसिद्ध है?

महाराणा प्रताप का सबसे बड़ा गुण क्या था?

मृत्यु

महाराणा प्रताप की तलवार का वजन कितना था?


उसी समय महाराणा प्रताप ने देश की वर्तमान राजनितिक स्थति के बारे में जानकारी प्राप्त करना शुरू कर दिया. भविष्य को ध्यान में रखते हुए महाराणा प्रताप ने अपने मित्रो का चयन कर, उन्हें प्रशिक्षित करना शुरू कर दिया. 16 मार्च 1559 में महाराणा प्रताप को अजबदे की कोख से अमरसिंह नामक पुत्र की प्राप्ति हुई.


भारत में उस समय अकबर अपने सम्राज्य का विस्तार करने में लगा हुआ था. सम्पूर्ण राजपुताना उसके समक्ष झुक गया था. केवल एक मेवाड़ अडिग था. अकबर का मेवाड़ पर आक्रमण प्रतीक्षित था.


भविष्य में सघर्ष की योजना बनने लगी. महाराणा प्रताप अपने विश्वस्त मित्रों भामाशाह, ताराचंद, झाला मानसिंह आदि वीरो के साथ विजय स्तम्भ की तलहटी में सम्पूर्ण परिस्थतियो में विचार करते, मेवाड़ सुरक्षा की योजना बनाते.


इसी दौरान आपसी मन मुटाव के कारण महाराणा प्रताप का छोटा भाई शक्तिसिंह नाराज होकर अकबर के पास चला गया.


अकबर के मेवाड़ आक्रमण की योजना पर वह चित्तोड़ लौट आया तथा समाचार दिया, युद्ध परिषद केनिर्णय के कारण महाराणा उदयसिंह सपरिवार उदयपुर चले गये.


महाराणा प्रताप को भी मन मसोस कर साथ जाना पड़ा. पीछे कमान जयमल राठौड़ एवं पत्ता चुण्डावत को सौपी गईं. अक्टूबर 1567 में अकबर ने चितोड़ पर आक्रमण कर दिया.


आरंभिक जीवन :

        

 महाराणा प्रताप का जन्म कुम्भलगढ दुर्ग में हुआ था। महाराणा प्रताप की माता का नाम जैवन्ताबाई था, जो पाली के सोनगरा अखैराज की बेटी थी। महाराणा प्रताप को बचपन में कीका के नाम से पुकारा जाता था। महाराणा प्रताप का राज्याभिषेक गोगुन्दा में हुआ। बचपन से ही महाराणा प्रताप साहसी, वीर, स्वाभिमानी एवं स्वतंत्रताप्रिय थे। सन 1572 में मेवाड़ के सिंहासन पर बैठते ही उन्हें अभूतपूर्व संकोटो का सामना करना पड़ा, मगर धैर्य और साहस के साथ उन्होंने हर विपत्ति का सामना किया।


 मुगलों की विराट सेना से हल्दी घाटी में उनका भरी युद्ध हुआ। वहा उन्होंने जो पराक्रम दिखाया, वह भारतीय इतिहास में अद्वितीय है, उन्होंने अपने पूर्वजों की मान – मर्यादा की रक्षा की और प्रण किया की जब तक अपने राज्य को मुक्त नहीं करवा लेंगे, तब तक राज्य – सुख का उपभोग नहीं करेंगे। तब से वह भूमी पर सोने लगे, वह अरावली के जंगलो में कष्ट सहते हुए भटकते रहे, परन्तु उन्होंने मुग़ल सम्राट की अधीनता स्वीकार नहीं की। उन्होंने अपनी मातृभूमि की रक्षा के लिए अपना जीवन अर्पण कर दिया।


महाराणा प्रताप को बचपन में ही ढाल तलवार चलाने का प्रशिक्षण दिया जाने लगा क्योंकि उनके पिता उन्हें अपनी तरह कुशल योद्धा बनाना चाहते थे | बालक प्रताप ने कम उम्र में ही अपने अदम्य साहस का परिचय दे दिया था | जब वो बच्चो के साथ खेलने निकलते तो बात बात में दल का गठन कर लेते थे | दल के सभी बच्चो के साथ साथ वो ढाल तलवार का अभ्यास भी करते थे जिससे वो हथियार चलाने में पारंगत हो गये थे | धीरे धीरे समय बीतता गया | दिन महीनों में और महीने सालो में परिवर्तित होते गये | इसी बीच प्रताप अस्त्र श्श्त्र चलाने में निपुण हो गये और उनका आत्मविश्वास देखकर उदय सिंह फुले नही समाते थे |


महाराणा प्रताप का इतिहास


महाराणा प्रताप (प्रताप सिंह) का जन्म मेवाड़ के कुम्भलगढ़ किले में 9 मई 1540 हिन्दू कैलेडर के अनुसार ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष तृतीया) को हुआ था. यह किला उदयपुर शहर से 85 किलोमीटर दूर है. वे अपने पिता के सबसे बड़े पुत्र थे.


उनकी माँ महारानी जसवंताबाई थी. उनके पिता उदयपुर शहर के संस्थापक महाराजा उदयसिंह थे. प्रताप सिंह बचपन से ही बहुत बहादुर और साहसी थे. पूरा राज दरबार और मेवाड़ राज्य की जनता उनकी कुशलता और बहादुरी पर गर्व किया करती थी.


28 फरवरी 1572 ई में महाराणा उदयसिंह की मृत्यु हो गई और उसी दिन महाराणा प्रताप का 32 वर्ष की आयु में गोगुन्दा में राज्यारोहण हुआ था.


बहुत ही कम समय में इन्होने घुड़सवारी, अस्त्र-शस्त्र विद्या में श्रेष्ठता हासिल कर ली. मात्र सत्रह वर्ष की आयु में ही महाराणा प्रताप की शादी अजबदे पंवार नामक सुकन्या से हो गई, जो प्रताप की पहली पत्नी थी. वर्ष 1559 में इन्हें अमरसिंह के रूप में पुत्र धन की प्राप्ति हुई.


1567 में जब प्रताप मात्र 27 साल के थे उस समय अकबर की मुग़ल सेना ने चित्तोड़ पर आक्रमण कर अधिकार कर लिया. किला छीन जाने से प्रताप सिंह अपने पूरे परिवार सहित कुम्भलगढ़ से गोगुन्दा आ बसे.


उसी समय प्रताप ने मुगलों से लोहा लेने की ठान ली थी, मगर बड़े लोगों द्वारा स्थति को पक्ष में न देखकर महाराणा प्रताप को युद्ध करने से रोका.


महाराणा प्रताप की कहानी | Maharana Pratap Story In Hindi


मेवाड़ के राजा महाराणा प्रताप का जन्म 9 मई 1540 को राजस्थान के कुम्भलगढ़ में हुआ था। उनके पिता का नाम सिसोदिया राजवंश के महाराणा उदय सिंह तथा माता का महारानी जयवंता बाई था, जो पाली के सोनगरा राजपूत अखैराज की पुत्री थी। बचपन में महाराणा प्रताप को कीका के नाम से पुकारा जाता था।


बचपन से ही महाराणा प्रताप को युद्ध कला सीखने में काफी रुचि थी, जिसके चलते महाराणा प्रताप आगे चलकर एक महापराक्रमी राजा बने। महाराणा प्रताप का प्रथम राज्याभिषेक फरवरी 1572 में गोगुंदा में हुआ था, लेकिन विधि-विधान स्वरूप महाराणा प्रताप का द्वितीय राज्याभिषेक 1572 में ही कुम्भलगढ़ दुर्ग में हुआ था। इस राज्याभिषेक में राव चंद्रसेन भी मौजूद थे, जो जोधपुर के राठौर शासक थे।


सफलता


1579 से 1585 तक पूर्व उत्तर प्रदेश, बंगाल, बिहार और गुजरात के मुग़ल अधिकृत प्रदेशों में विद्रोह होने लगे थे और महाराणा भी एक के बाद एक गढ़ जीतते जा रहे थे इसका परिणाम यह रहा कि अकबर उस विद्रोह को दबाने में उल्झा रहा और मेवाड़ पर से मुगलो का दबाव कम हो गया। इस बात का लाभ उठाकर महाराणा ने 1585 में मेवाड़ मुक्ति प्रयत्नों को और भी तेज कर दिया। महाराणा की सेना ने मुगल चौकियों पर आक्रमण शुरू कर दिए और तुरंत ही उदयपूर सहित 36 महत्वपूर्ण स्थान पर फिर से महाराणा का अधिकार स्थापित हो गया। महाराणा प्रताप ने जिस समय सिंहासन ग्रहण किया , उस समय जितने मेवाड़ की भूमि पर उनका अधिकार था , पूरी तरह से उतने ही भूमि भाग पर अब उनकी सत्ता फिर से स्थापित हो गई थी। बारह साल के संघर्ष के बाद भी अकबर उसमें कोई परिवर्तन न कर सका और इस तरह महाराणा प्रताप समय की लंबी अवधि के संघर्ष के बाद मेवाड़ को मुक्त करने में सफल रहे और ये समय मेवाड़ के लिए एक स्वर्ण युग साबित हुआ। मेवाड़ पर लगा हुआ अकबर ग्रहण का अंत 1585 ई. में हुआ। उसके बाद महाराणा प्रताप उनके राज्य की सुख-सुविधा में जुट गए।


मृत्यु


राज्य की सुख-सुविधा के लिए काम करने के ग्यारह वर्ष के बाद ही दुर्भाग्यवश 19 जनवरी 1597 में अपनी नई राजधानी चावंड में उनकी मृत्यु हो गई। ‘एक सच्चे राजपूत, शूरवीर, देशभक्त, योद्धा, मातृभूमि के रखवाले के रूप में महाराणा प्रताप दुनिया में सदैव के लिए अमर हो गए।


FAQ-question answer


प्रश्न-महाराणा प्रताप का सबसे बड़ा गुण क्या था?

उत्तर- अपनी मातृभूमि के प्रति उनके अटूट प्रेम नेतृत्व कौशल और चयन कौशल ने मुगलों की दर सेवा के खिलाफ उनकी जीत की नींव राखी और उनके अंदर एक संवेदनशील इंसान ने उन्हें मेवाड़ का अजय राजा बना दिया।


प्रश्न-महाराणा प्रताप क्यों प्रसिद्ध है?

उत्तर- महाराणा प्रताप को मुगल साम्राज्य के विस्तारवाद के खिलाफ उनके सैन्य प्रतिरोध और हल्दीघाटी की लड़ाई और दवेर की लड़ाई में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका के लिए जाना जाता है। उन्होंने मुगल बादशाह अकबर को तीन बार 1577, 1578 और 1579 में हराया था।


प्रश्न-महाराणा प्रताप की तलवार का वजन कितना था?

उत्तर- राजपूत राजा महाराणा प्रताप दो तलवार रखते थे जिनका भजन लगभग 25 किलो होता था। ऐसा कहा जाता है कि अगर वह निहित्ता होता तो लड़ाई से पहले वह अपने दुश्मन को एक तलवार पेश करता था वर्तमान में तलवार राजस्थान के उदयपुर में महाराणा प्रताप संग्रहालय में रखें गई हैं।



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