Berojgari ki samasya aur uska samadhan athva berojgari aur use dur karne ke upay per nibandh//बेरोजगारी की समस्या और उसका समाधान पर निबंध

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Berojgari ki samasya aur uska samadhan athva berojgari aur use dur karne ke upay per nibandh//बेरोजगारी की समस्या और उसका समाधान पर निबंध

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बेरोजगारी की समस्या और उसका समाधान


अथवा


बेरोजगारी और उसे दूर करने के उपाय


संकेत बिंदु- प्रस्तावना, बेरोजगारी का अर्थ,  बेरोजगारी के कारण, बेरोजगारी कम करने के उपाय, बेरोजगारी के दुष्प्रभाव उपसंहार ।


   प्रस्तावना -आज अनेक  समस्या भारत के विकास में बाधा उत्पन्न कर रही हैं बेरोजगारी की समस्या इसमें से एक है हर वर्ग का युवक इस समस्या से जूझ रहा है


बेरोजगारी का अर्थ-जब कोई योग तथा काम करने का इच्छुक व्यक्ति काम  मांगे और उसे काम ना मिल सके अथवा जो अनपढ़ और अप्रशिक्षित है । वह भी काम के अभाव में बेकार हैं

कुछ बेरोजगार काम करने पर तो लगे हैं लेकिन वह अपनी योग्यता से बहुत कम धन कमा पाते हैं इसलिए वह स्वयं को बेरोजगार ही मानते हैं बेरोजगारी के कारण देश का आर्थिक विकास रुक जाता है एक सर्वेक्षण के अनुसार यह संख्या वर्ष 1985 में 3 करोड़ से अधिक थी जबकि एक अनुमान के अनुसार प्रत्येक वर्ष यह संख्या लगभग 70 लाख की गति से बढ़ रही है

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बेरोजगारी के कारण- बेरोजगारी के प्रमुख कारण निम्नलिखित हैं

1. जनसंख्या में तीव्र गति से वृद्धि होना ।

2. शिक्षा प्रणाली में व्यावहारिक शिक्षा के स्थान पर 

सैद्धांतिक शिक्षा को अधिक महत्व दिया जाना।

3. कुटीर उद्योगों की अपेक्षा करने।

4. देश के प्राकृतिक संसाधनों का पूरी तरह से उपयोग नहीं करना।

5. भारतीय कृषि की दशा अत्यन्त पिछड़ी होने के कारण कृषि क्षेत्र में भी बेरोजगारी का बढ़ना।

6. कुशल एवं प्रशिक्षित व्यक्तियों की कमी के कारण उद्योगों को संचालित करने के लिए विदेशी कर्मचारियों को बाहर से लाना।


बेरोजगारी कम करने के उपाय -

बेरोजगारी कम करने के लिए निम्नलिखित उपाय अपनाए जाने चाहिए

1. जनता को शिक्षित कर जनसंख्या वृद्धि पर रोक लगाना।

2. शिक्षा प्रणाली में व्यापक परिवर्तन तथा सुधार करना।

3. कुटीर उद्योगों की दशा सुधारने पर जोर देना।

4. देश में विशाल उद्योगों की अपेक्षा लघु उद्योगों पर अधिक ध्यान देना। मुख्य उद्योगों के साथ- साथ सहायक उद्योगों का भी विकास करना।

5. सड़कों का निर्माण, रेल परिवहन का विकास, पुलों व बांधो का निर्माण तथा वृक्षारोपण आदि करना, जिससे अधिक- से-अधिक संख्या में बेरोजगारों को रोजगार मिल सके।

6. सरकार द्वारा कृषि को विशेष प्रोत्साहन एवं सुविधाएं देना, जिससे युवा गांवों को छोड़कर शहरों की ओर ना जाए।


बेरोजगारी के दुष्प्रभाव रोजगारी अपने आप में एक समस्या होने के साथ-साथ अनेक सामाजिक समस्याओं को भी जन्म देती है। उन्हें यदि बेरोजगारी के दुष्परिणाम अथवा दुष्प्रभाव कहे, तो अनुचित नहीं होगा। बेरोजगारी के कारण निर्धनता मैं वृद्धि होती है तथा भुखमरी की समस्या उत्पन्न  होती है। बेरोजगारी के कारण मानसिक अशांति की स्थिति में लोगों के चोरी, डकैती, हिस्सा, अपराध, हत्या आदि की ओर प्रवृत्त होने की पूरी संभावना बनी रहती है। अपराध एवं हिस्सा में हो रही वृद्धि का सबसे बड़ा कारण रोजगारी ही है। कई बार तो बेरोजगारी की भयावह इससे तंग आकर लोग आत्महत्या भी कर बैठते हैं।


उपसंहार बेरोजगारी किसी भी देश के लिए एक अभिशाप से काम नहीं है। इसके कारण नागरिकों का जीवन स्तर बुरी तरह से प्रभावित होता है तथा देश की आर्थिक वृद्धि विवादित होती है, इसलिए सरकार तथा सक्षम निजी संस्थाओं द्वारा इस समस्या को हल करने लिए ठोस कदम उठाएं जाने की तत्काल आवश्यकता है।


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